हरिद्वार धरम नगरी के अलकनंदा घाट गाजा की अवैध बिक्री का गढ़ बनता जा रहा है। जिस धरम नगरी की पहचान धार्मिक नगरी के नाम पर जानी जाती है वहां गाजा की अवैध कारोबार तेजी से अपने पांव पसार चुका है। यह कारोबार न सिर्फ युवाओं को बरबादी की राह पर धकेल रहा है, बल्कि पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
छोटे दांव से बड़े खेल तक धरम नगरी मे देखने को मिलते है,,
स्थानीय लोगों के अनुसार गाजा का खेल दिनों दिन तेज़ी पकड़ता रहा है। यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम करता है – एक ओर “गाजा ” के बिक्री के आंकड़े तय होते हैं तो दूसरी ओर रकम की वसूली व वितरण के लिए बाकायदा एजेंट तैनात रहते हैं।
युवाओं के भविष्य पर काला साया,मंडरा रहा है,,
गाजा की लत ने कई परिवारों को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। हरिद्वार अलकनंदा घाट के 18 से 25 वर्ष के युवा सबसे अधिक इस जाल में फंस रहे हैं। आसानी से पैसा कमाने के लालच में पढ़ाई छोड़कर गाजा के लत में डूबे रहते हैं। कई मामलों में जब बर्बाद हो जाते हैं तो कर्ज चुकाने के लिए चोरी, मारपीट या अन्य अपराधों का रास्ता पकड़ लेते हैं।
इस वजह से हरिद्वार अलकनंदा घाट की मान मर्यादा धूमिल होती जा रही है।
हलाकि पुलिस द्वारा भी समय समय पर छापे की कार्यवाही की जाती है बावजूद इसके गुप्त रूप से बड़े स्तर पर चल रहा अलकनंदा घाट पर गांजा बेचने वाली का नेटवर्क, काफी स्ट्रांग है,,
आप को बता दें कि क्षेत्रवसियों को स्वयं भी इनके खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ेगा, हलाकि ज़ब भी पुलिस को इनकी कोई सूचना देता है यों पुलिस तुरंत कार्यवाही कर इन पर दबिश डालती है, लेकिन इनका नेटवर्क इतना मजबूत ओर सटीक है कि ज़ब भी इनकी ओर कोई रुख करता है तो इनके गुर्गे पहले ही इन तक सूचना पहुंचा देते है,,,
