नवोदय नगर में जमीन घोटाले का विस्फोट: पट्टों से करोड़ों की साजिश, घरों के नीचे खिसकी जमीन!
नवोदय नगर—कभी टिहरी विस्थापितों के पुनर्वास का प्रतीक—आज कथित तौर पर जमीन के सबसे बड़े फर्जीवाड़े का अखाड़ा बनता दिख रहा है। जिन परिवारों को सरकार ने पट्टे देकर बसाया, उन्हीं पट्टों को दलालों ने औने-पौने दामों में खरीदकर करोड़ों की कमाई कर डाली। दुखद यह कि आज नवोदय नगर घनी आबादी वाला इलाका है, पर सैकड़ों परिवार ऐसे हैं जिन्हें यह तक पता नहीं कि वे जिस जमीन पर घर बनाकर रह रहे हैं, वह उनकी है भी या नहीं।
हालिया जांच में जब टीडीसी और राजस्व विभाग के लेखपालों की टीम मौके पर पहुंची, तो हकीकत देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। रजिस्ट्री दिखाई गई, खसरा नंबर मिलाए गए—और सच ऐसा निकला कि लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। कई घरों की रजिस्ट्री जिन खसरा नंबरों पर है, वे उनके मकानों से काफी दूर पाए गए। यानी एक के नाम की जमीन पर दूसरा रह रहा है और दूसरा किसी और की जमीन पर—दोनों ही धोखाधड़ी के शिकार!
सबसे चौंकाने वाला मामला 394 खसरा नंबर का बताया जा रहा है, जहां रह रहे लोग 421 और 399 खसरा नंबर की रजिस्ट्री के आधार पर बसे हैं। यह केवल एक-दो गलियों की कहानी नहीं—पूरे नवोदय नगर में जमीन का जालसाज नेटवर्क सामने आता दिख रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि 421, 399, 390 समेत अन्य खसरों की समग्र जांच कब होगी? किन हाथों से ये रजिस्ट्री कराई गईं? और किसकी लापरवाही या मिलीभगत से यह खेल इतने साल चला?
हालांकि अभी लिखित रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन मांग तेज है कि पुनर्वास विभाग और कुछ राजस्व लेखपालों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। जनता पूछ रही है—अगर अब नहीं जागे, तो कल किसके घर पर बुलडोज़ की दस्तक होगी? यह सिर्फ जमीन नहीं, सैकड़ों परिवारों के सपनों का सवाल है।
