हरिद्वार सिडकुल रावली महदूद रविदास मंदिर के कुछ ही दूरी पर हो रहा सट्टे का बाजार, सांम होते ही शुरू हो जाता है सट्टे व खाई बाड़ी का बड़े स्तर पर मायाजाल, एक बड़ी ओर अहम कार्यवाही के इन्तजार मे जनता हरिद्वार जनपद का हरिद्वार के सिडकुल रावली महदूद रविदास मंदिर पास के क्षेत्र में इन दिनों अवैध गतिविधियों का गढ़ बनता जा रहा है। जिस इलाके की पहचान कॉलोनी के शांत वातावरण और विकासशील कॉलोनियों से होनी चाहिए, वहां अब सट्टेबाजी और खाई बाड़ी का अवैध कारोबार तेजी से अपने पांव पसार चुका है। सांम ढलते ही हरिद्वार सिडकुल रावली महदूद क्षेत्र सट्टा बाजार में तब्दील हो जाते हैं। मोबाइल फोन और गुप्त ठिकानों के सहारे चल रहा यह कारोबार न सिर्फ युवाओं को बरबादी की राह पर धकेल रहा है, बल्कि पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है,
स्थानीय लोगों के अनुसार हरिद्वार सिडकुल रावली महदूद रविदास मंदिर के कुछ ही दूरी पर शाम 6 बजे के बाद से सट्टा खाई बाड़ी का खेल तेज़ी पकड़ लेता है। यहां तक कि कुछ घरों के भीतर भी यह कारोबार चल रहा है। 50-100 रुपये की छोटी रकम लगाने वाले युवक धीरे-धीरे बड़े दांव पर उतर आते हैं। कहा जाता है कि इस क्षेत्र में प्रतिदिन लाखों रुपये का अवैध लेन-देन हो रहा है। खास बात यह है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम करता है – एक ओर “खाई-बाड़ी” के नाम पर नंबर और आंकड़े तय होते हैं तो दूसरी ओर रकम की वसूली व वितरण के लिए बाकायदा एजेंट तैनात रहते हैं।
युवाओं के भविष्य पर काला साया
सट्टे की लत ने कई परिवारों को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। मोहल्ले के 18 से 25 वर्ष के युवा सबसे अधिक इस जाल में फंस रहे हैं। आसानी से पैसा कमाने के लालच में पढ़ाई छोड़कर पूरी रात “नंबर” और “खाई-बाड़ी” के चक्कर में डूबे रहते हैं। कई मामलों में जब दांव हार जाते हैं तो कर्ज चुकाने के लिए चोरी, मारपीट या अन्य अपराधों का रास्ता पकड़ लेते हैं। इस वजह से हरिद्वार बिरला घाट की छवि लगातार धूमिल होती जा रही है।
हलाकि पुलिस द्वारा भी समय समय पर कि जाती है आवश्यक कार्यवाही, बावजूद इसके गुप्त रूप से बड़े स्तर पर चल रहा सट्टे का नेटवर्क,
बता दें कि क्षेत्रवसियों को स्वयं भी इनके खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ेगा, हलाकि ज़ब भी पुलिस को इनकी कोई सूचना देता है यों पुलिस तुरंत कार्यवाही कर इन पर दबिश दे डालती है, लेकिन इनका नेटवर्क इतना मजबूत ओर सटीक है कि ज़ब भी इनकी ओर कोई रुख करता है तो इनके गुर्गे पहले ही इन तक सूचना पहुंचा देते है, जो सड़को ओर गलियों मे जगह जगह खडे होकर इनकी पहरेदारी करते है,जिस कारण यें समय रहते बचकर निकल जाते है, दूसरा इनका कोई एक स्थाई अड्डा नहीं होता, ये जगह बदल बदल कर अपने अवैध कार्य को अंजाम दे रहे है,
