शिवालिक नगर पालिका परिषद के चुनाव में वार्ड नंबर 13 की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बन गई है। यह वार्ड क्षेत्रफल और जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़ा है और पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत में अहम योगदान देने वाले वार्डों में से एक रहा था। लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी बदली हुई नजर आ रही है। मतदाताओं में पार्टी को लेकर नाराज़गी बढ़ रही है। विकास की उम्मीदें पूरी न होने, जमीनी कार्यकर्ताओं को टिकट न मिलने और क्षेत्रवाद के बढ़ते प्रभाव के चलते जनता इस बार बदलाव की मांग कर रही है।
*वार्ड का बदला हुआ सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य*
वार्ड नंबर 13 में जनसंख्या का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। यहां नवोदय नगर में प्रवासी लोगों की संख्या बढ़ गई है, जो सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्र में नौकरी और रोजगार की तलाश में आए हैं। विभिन्न राज्यों और जातियों के लोग यहां बस चुके हैं, जिससे छोटे-छोटे संगठन और समाज आधारित संस्थाएं उभर आई हैं। पूर्वांचल समाज, पर्वतीय समाज, और मैदानी समाज जैसे संगठन मतदाताओं को प्रभावित कर रहे हैं।
साथ ही, दीप गंगा, हरिद्वार ग्रीन, सरकारी कॉलोनी रोशनाबाद, कलेक्ट्रेट क्षेत्र, पुलिस लाइन और अन्य प्रमुख इलाकों में, जहां मुख्य रूप से अपार्टमेंट संस्कृति में रहने वाले लोग हैं, साइलेंट मतदाता के रूप में उभर रहे हैं। ये लोग किसी पार्टी विशेष से कम जुड़े हैं और अपने निर्णय को लेकर चुप रहते हैं।
*क्षेत्रवाद बनाम सर्वसमाज की सोच*
इस बार का चुनाव क्षेत्रवाद बनाम सर्वसमाज के मुद्दे पर होता दिखाई दे रहा है। गढ़वाली और कुमाऊनी समाज के बीच क्षेत्रवाद का असर दिख रहा है, जहां दोनों समूह अपने-अपने उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, मैदानी समाज के लोग एकजुट होकर अपने प्रतिनिधि को जिताने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, जनता में यह समझदारी भी बढ़ रही है कि क्षेत्रवाद को बढ़ावा देना समाज के लिए हानिकारक है।
कई निर्दलीय उम्मीदवार क्षेत्रवाद के सहारे अपनी जीत सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। जनता अब विकास और सर्वसमाज के उत्थान पर अधिक जोर दे रही है।
*पार्टी से नाराज़गी और साइलेंट मतदाताओं का प्रभाव*
कुछ पूर्व पार्षद और पार्टी से जुड़े लोग टिकट न मिलने के कारण निर्दलीय के रूप में खड़े हो गए हैं। लेकिन उनमें से पहले से सत्तारूढ़ पार्टी के लिए सक्रिय सदस्यों में कुछ का कार्य केवल क्षेत्रवाद तक सीमित रहा। दूसरी ओर, पार्टी के अंदर ही कई पदाधिकारी गुपचुप निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
*राष्ट्रीय पार्टियों का कट्टर वोटर और कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता निर्दलीयों का जोड़*
हालांकि राष्ट्रीय पार्टियों का अपना कट्टर वोटर अभी भी उनके साथ है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के लिए भी लोगों का रुझान बढ़ता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता और जनसमर्थन बीजेपी के लिए टेंशन बढ़ा सकती है, जिससे चुनावी मुकाबला और रोचक हो सकता है। इसके साथ ही अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ सेवा निवृत्त बड़े सरकारी अधिकारी की अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी चुनाव को और गर्मा रही है।
*सोशल मीडिया बनाम जमीनी कार्य*
जनता अब केवल प्रचार और सोशल मीडिया पर दिखावा करने वाले नेताओं से दूर रहना चाहती है। मतदाता ऐसे प्रतिनिधि की तलाश में हैं, जो बिना भेदभाव के हर समाज और वर्ग के लिए काम करे। जो सिर्फ फोटो खिंचवाने और प्रचार करने में व्यस्त न हो, बल्कि वाकई क्षेत्र के विकास में योगदान दे।
*निष्कर्ष*
वार्ड नंबर 13 का चुनाव इस बार क्षेत्रवाद, पार्टी के प्रति नाराज़गी, और विकास के मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। मतदाता अब समझदार हो गए हैं और क्षेत्रवाद या जातिवाद के भरोसे चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों को करारा जवाब देने का मन बना चुके हैं।
सर्वसमाज को साथ लेकर चलने वाला, पढ़ा-लिखा, और हर वर्ग के लिए काम करने वाला उम्मीदवार ही इस बार जनता की पहली पसंद बनेगा। यह चुनाव केवल वोटों का खेल नहीं, बल्कि यह तय करेगा कि क्षेत्र का विकास और सामाजिक समरसता किस दिशा में जाएगी।
*(यह रिपोर्ट संवाददाता द्वारा क्षेत्रीय जनता से बातचीत और वार्ड के माहौल का विश्लेषण करने पर आधारित है जिसमें कि समाज सेवी दीपक नौटियाल निर्दलीय उम्मीदवार भारी जनमत से आगे हैँ ।)*—
