उत्तराखंड मे हाथियों पर मंडराये संकट के बादल,, लापरवाही किसकी,,?
( 25 वर्ष मे 170 हाथी कालकलवित आखिर कौन है जिम्मेदार )
हरिद्वार वन प्रभाग में एक सप्ताह में तीसरे हाथी की मौत हो गई है। अब लालढांग में मृत अवस्था में हाथी मिला है। लगातार हो रही हाथियों की मौत से सवाल उठ रहे हैं। खानपुर रेंज के बंदरजूड़ के पास 26 सितंबर को मृत हालत में हाथी मिला था। खानपुर रेंज में ही 30 सितंबर को बुग्गावाला रोशनाबाद मार्ग से तीन सौ मीटर अंदर खेत में मृतक हाथी मिला था। प्रथम दृष्टया हाथी की मौत किसान की ओर से खेत पर फसल बचाने के लिए छोड़े गए करंट से हुई थी।
राज्य में 25 साल में अप्राकृतिक कारणों से 167 हाथियों की हुई मौत चितांजनक है। करंट, ट्रेन से टकराने, दुर्घटना और शिकार के कारण हाथियों की मौत हुई है।
राज्य में 25 वर्ष में 167 हाथियों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई है। हाल के दिनों में ही हरिद्वार वन प्रभाग में तीन हाथियों की मौत हुई है। इसमें में भी एक हाथी की मौत करंट लगने से हुई है। जबकि दूसरे हाथी की मौत का कारण स्पष्ट नहीं है और तीसरे की मौत बीमारी के कारण हुई है।
प्रदेश में हाथियों की सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए जा रहे हैं। ट्रेनों से टकरा कर होने वाली मौतों को रोकने के लिए कई स्थानों पर ट्रेनों की गति को कम किया गया है। इसके अलावा अन्य माध्यमों के इस्तेमाल की भी योजना है। पर इन कोशिशों के बीच हाथियों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई है।
