महाराजा अग्रसेन की जयंती के अवसर पर अग्रवाल समाज द्वारा आयोजित भव्य शोभायात्रा ने लक्सर शहर के प्रमुख मार्गों पर रंग भर दिया। शोभायात्रा के दौरान महाराजा अग्रसेन की भव्य प्रतिमा को विशेष रूप से वाहन पर स्थापित किया गया, जिससे समुदाय में उत्साह और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। यह आयोजन शारदीय नवरात्रि के प्रारंभ के साथ ही संपन्न हुआ, जो अग्रहरी, अग्रवाल और जैन समुदायों के लिए विशेष महत्व रखता है।शोभायात्रा का शुभारंभ दोपहर 2 बजे शनिदेव मंदिर से हुआ जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महाराजा अग्रसेन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। रंग-बिरंगे झंडे, फूलों से सजी घोड़ी-हाथी और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर चलने वाली यह यात्रा शनि मंदिर से गुजरते हुए मेन बाजार होकर स्टेट बैंक तक पहुंची। यात्रा में महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा को सोने-चांदी के आभूषणों से सजाकर विशेष वाहन पर स्थापित किया गया था, जो यात्रा का मुख्य आकर्षण बनी रही। प्रतिमा के दर्शन मात्र से ही लोग भावविभोर हो उठे और ‘महाराजा अग्रसेन की जय’ के नारे गूंजते रहे।अग्रवाल समाज के अतुल गुप्ता राहुल अग्रवाल अमित कुमार रिंकू राजेश गुप्ता सचिन अग्रवाल लाला सेवाराम ईश्वरचंद ने बताया”महाराजा अग्रसेन एकता अहिंसा और समाजसेवा के प्रतीक थे। उनकी जयंती पर यह शोभायात्रा उनके आदर्शों को जीवंत करने का माध्यम है। हमने ‘एक रुपया, एक ईंट’ के सिद्धांत को याद करते हुए सामूहिक भोज का भी आयोजन किया, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया।” कार्यक्रम में भजन-कीर्तन, नाट्य प्रस्तुतियां और महाराजा अग्रसेन के जीवन पर आधारित व्याख्यान भी हुए, जो उपस्थितजनों को उनके गणराज्य स्थापना और वनिका धर्म अपनाने की प्रेरणा देते रहे।
महाराजा अग्रसेन का जन्म द्वापर युग के अंत में हुआ था और वे भगवान राम के वंशज माने जाते हैं। उनके 18 गोत्रों वाले अग्रवाल समुदाय ने इस अवसर पर दान-पुण्य का भी विशेष आयोजन किया। उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश रहने से उत्सव का दायरा और व्यापक हो गया।शोभायात्रा के समापन पर आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। समुदाय के सदस्यों ने एकजुट होकर सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया, जो आज के दौर में प्रासंगिक लगता है। आने वाले वर्षों में भी ऐसे आयोजनों से महाराजा अग्रसेन के सपनों को साकार करने का संकल्प लिया गया।
