तीन जिगरी यार पहले बड़े सलीके से सड़क किनारे बैठे, बोतल खोली, पेग बनाए और दोस्ती के जाम टकराए। माहौल बिल्कुल फिल्मी था—हंसी, ठहाके और ज्ञान की बौछार। लेकिन जैसे-जैसे दारू अंदर गई, अक्ल बाहर निकलती गई।
पहले बहस हुई कि सबसे ज़्यादा पी कौन गया, फिर मुद्दा आया गिलास टेढ़ा क्यों है, और बस वहीं से सड़क बन गई युद्धभूमि। एक ने शेर बनकर दहाड़ लगाई, दूसरा पहलवान बना, तीसरा बीच-बचाव करने आया और खुद ही रिंग में कूद पड़ा।
कुछ ही मिनटों में सड़क पर कुश्ती, मुक्के और गालियों का लाइव शो शुरू हो गया। राहगीर रुके, मोबाइल निकले और बोले—“भाई, टिकट फ्री है!”
नतीजा—दोस्ती गई तेल लेने, दारू जीत गई, और सड़क हार गई।
